- यादें - स्व. मदन मोहन, संगीतकार- 14 जुलाई पुण्यतिथि पर विशेषरूह में समा जाने वाली कशिश भरी आवाज, जिसे सुनकर मदन मोहन साहब के बारे में जानने की उत्सुकता जाग उठती है। सेना में बंदूक थामने वाले हाथ जाने कब हारमोनियम पर संगीत रचाने लगे, यह पता ही न चला और देश के महान संगीतकारों में से एक मदन मोहन का नाम भी इस क्षेत्र में मील का पत्थर बन गया। 1950 से 1970 तक के तीन दशकों में जिनके गीतों की धूम रही, ऐसे रूहानी संगीत के अनूठे फनकार, गजल के शहजादे...
यादें - स्व. राहुल देव बर्मन, संगीतकार जन्मतिथि- 27 जून 1939जिसके रोने से पंचम सुर निकलता था और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से हटकर नए प्रयोगों का केमिकल लोचा जिनके दिमाग में भरा हुआ था। सुमधुर संगीत की रचना में जिनका कोई सानी आज भी नहीं है, संगीत की ऐसी मसीहाई शख्सियत शायद ही दोबारा इस नश्वर संसार में जन्म लेगी। नाम था आर. डी. यानि राहुल देव बर्मन यानि पंचम दा, मां-पिता ने तो उसका नाम राहुल ही रखा था, लेकिन हीरे की पहचान जौहरी ही कर सकता था,...
इतिहास -17 जून का इतिहास यानि दो प्रसिध्द नारियों पर चर्चा का दिन, इसलिए कि आज ही के दिन एक ने जंग के मैदान में अपनी मर्दानगी दिखाकर अंग्रेजों के हौसले पस्त कर दिए और मातृभूमि पर कुर्बान हो गई। दूसरी पर किस्मत ही इतनी ज्यादा मेहरबान थी कि उसकी मौत के बाद उसके मजार पर दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत गढ़ी गई। जिसे लोग प्रेम का अनूठा प्रतीक मानते हैं। पर इनमें एक समानता है कि वे दोनों ही मातृत्व सुख नहीं पा सकीं।पहली नारी मनु यानि खूब लड़ी मर्दानी,...
14 जून - विश्व रक्तदाता दिवस पर विशेषछत्तीसगढ़ प्रदेश के बस्तर की हरी-भरी धरती आए दिन लहू से लाल हो रही है। रोजाना लोग मारे जा रहे हैं, कभी पुलिस जवान, कभी नक्सली, कभी एसपीओ तो कभी भोले-भाले आदिवासी। बड़ा सवाल है कि आखिर ये अंधा युध्द कब खत्म होगा ? ऐसा लग रहा है जैसे अंग्रेजी उपान्यासकार ब्रैम स्टोकर का काल्पनिक पात्र डैकुला बस्तर में अपनी रक्तपिपासु इच्छा के साथ पूरे वेग से वर्चस्व कायम कर रहा है। दुनिया को अमन चैन की जरूरत है न कि...
विश्व भर में हवाई मौतों का सिलसिला खतरनाक हो चला है। आए दिन आसमानों की उड़ान भरने वाले विमान, हैलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं। ऐसे हादसों में लोगों का बचना नामुमकिन होता है। हवा में उड़ती मौतों ने अब तक हजारों जानें ली हैं। एक मामूली सी लापरवाही कई जिंदगियों को लील लेती है। हवाई सेवाओं के खतरों से लोग अनजान नहीं हैं। पहले भी ऐसी वारदातें हुई हैं, जिन्होंने मानव मन को झकझोरा है। ग्वालियर राजघराने के माधवराव सिंधिया, आंध्रप्रदेश के...
विश्व मजदूर दिवसजिंदगी में सफल होने के लिए दो चीजों की काफी जरूरत है, हिम्मत और मेहनत। हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती, मेहनत करने वाले कभी विफल नहीं होते। दुनिया की संरचना में भी मेहनत करने वाले श्रमवीरों ने समय-समय पर नए इतिहास रचे हैं। अपना पसीना बहाकर आसमान छूती इमारतों को खड़ा करने वाले आज भी जमीन पर हैं और बुलंद इमारतों के उपर खड़ा धनाढ्य वर्ग मुस्कुराता हुआ इठला रहा है।आज जिस खूबसूरत इमारत ताजमहल को देखने के लिए देश ही नहीं,...
कितना औद्योगिकरण जरूरी है ?उद्योगों की चिमनियों से निकलता काला-सफेद धुआं, सरकारी जमीनों पर कब्जा करती राख, कम होती कृषि भूमि और जनता का विरोध, इन उद्योगों के लगने से देश, प्रदेश, शहर, गांव का विकास होगा, या फिर लोगों के हिस्से में आएगा धूल, धुआं और राख, बढ़ेगा तापमान, तो गर्मी से कैसे निजात पाएंगे लोग, धान का कटोरा बन जाएगा का राख का कटोरा, इसलिए ऐसे औद्योगीकरण के पहले ग्लोबल वार्मिंग पर विचार करना भी जरूरी है। पर्यावरण के सौदागर भूल चुके...
0 बुजुर्ग ग्रामीण ने मुख्यमंत्री से कहा 0 कोसमंदा में उतरा मुख्यमंत्री का उड़नखटोला मुख्यमंत्री डॉं. रमनसिंह जब कोसमंदा गांव पहुंचे तो एक बुजुर्ग ग्रामीण को भीड़ में जद्दोजहद करते देखकर उन्होंने अपने पास बुला लिया और पूछा - राम राम बबा, कईसे आए हस, कुछु समस्या हे का। तब बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री को जवाब दिया - नईं साहेब, तूंहर दरसन करे आए हवं। ग्रामीण की भावना से मुख्यमंत्री डा. सिंह काफी द्रवित हो गए, उसके बाद गांव की कई समस्याओं का निराकरण...
0 जलस्तर में लगातार गिरावट0 10 वर्षों बाद उपजेगा घोर जल संकटछत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने जांजगीर-चांपा जिले में 34 पावर कंपनियों से 40 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए एमओयू करके आम जनता के भविष्य को संकट में डाल दिया है। 40 हजार मेगावाट के विद्युत उत्पादन के लिए प्रतिवर्ष 16000 लाख घनमीटर पानी की जरूरत होगी, समझा जा सकता है कि इतनी बड़ी मात्रा में जब उद्योगों को पानी दिया जाएगा, तो आम जनता के लिए पानी कहां से आएगा ? सबसे खास बात यह है...
छत्तीसगढ़ प्रदेश में 19 अप्रेल से ग्राम सुराज अभियान का आगाज हो चुका है। गांवों, गरीबों की समस्याओं की सुध लेने तथा उसे हल करने के लिए मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सहित कई मंत्री, विधायक, सरकारी अधिकारी गांवों में पहुंच रहे हैं, पर इस बार ग्रामीणों के तीखे तेवरों से नेताओं और अधिकारियों को दो चार होना पड़ रहा है। कारण साफ है कि पिछले वर्षों में चलाए गए सुराज अभियान के तहत् मिले आवेदनों, समस्याओं का निपटारा अब तक नहीं हुआ है। अधिकारियों कर्मचारियों...
ग्राम सुराज अभियान के पहले दिन ही कई सुराज दलों को ग्रामीणों के आक्रोश से दो चार होना पड़ा। बिर्रा क्षेत्र में प्रस्तावित मोजरबेयर पावर कंपनी के प्लांट का विरोध करते हुए सिलादेही के ग्रामीणों ने सुराज दल को स्कूल के अंदर जाने ही नहीं दिया। सुराज दल को रोके जाने की सूचना पर गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों को भी कई घंटे बिठाए रखा और सुराज अभियान का बहिष्कार कर दिया। ...
देश में हर तरफ अण्णा राग की धूम है। फेसबुक अण्णा हजारे की खबरों से भरी पड़ी है, मोबाईल में संदेश आ रहे हैं उनके आंदोलन को समर्थन देने के लिए। ब्लाग पर भी अण्णा की ही बातें पढ़ने को मिल रही हैं। हालात कुछ उसी तरह के बन गए हैं जैसे तमाम भ्रष्ट मंत्रियों, संतरियों की लाइलाज बीमारी का तोड़ एक अनार (अन्ना) ही हो। कोई सत्याग्रही बापू से उनकी तुलना कर रहा है, कोई उन्हें जेपी जैसा क्रांतिकारी बता रहा है। उनके एक उपवास, आमरण अनशन पर अब तक महाराष्ट्र...
37 वर्षों से एक ही बिस्तर पर कोमा का दंश झेल रही अरूणा शानबाग को इच्छा मृत्यु दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी असहमति जता दी है यानि फिलहाल उसकी मौत अब हरि इच्छा पर ही निर्भर है। पुरूष प्रधान देश में सदियों से नारी शोषण का शिकार होती आई है। खुद को पाक साफ बताने माता सीता को अग्निपरीक्षा देनी पड़ी थी, अहिल्या को पत्थर की मूरत बनकर श्राप झेलना पड़ा और कृष्णभक्त मीरा को जहर का प्याला पीना पड़ा। पुरूषत्व के दंभ और अत्याचार की कलयुगी परिणिति...
बाबा रामदेव ने विदेशों में जमा कालेधन को उजागर करने की पैरवी की है, पर दांव उल्टा पड़ गया और अब उनके वक्तव्यों से खार खाए लोग, उनके ट्रस्ट की संपत्ति का खुलासा करने की मांग कर रहे हैं। यह तो सर्वविदित है कि जिनके घर शीशे को हों, वे दूसरे के घरों पर पत्थर न उछालें, वरना नुकसान शीशे के घर में रहने वालों का ही अधिक होगा। बाबा रामदेव का फेंका हुआ तीर अब बूमरेंग की तरह वापिस लौटकर उन्हीं की तरफ आ रहा है। योगगुरू को यह तो सोच लेना चाहिए था कि राजनीति नाम की तलवार हर क्षेत्र पर लटक रही है, चाहे वह संसद हो, मीडिया हो या फिर अन्य उपक्रम,...
सूनी सड़क पर सुबह-सुबह एक काफिला सा चला आ रहा था, आगे-आगे कुछ लोग अर्थी लिए हुए तेज कदमों से चल रहे थे। राम नाम सत्य है के नारे बुलंद हो रहे थे। शहर में ये कौन भला मानुष स्वर्गधाम की यात्रा को निकल गया, पूछने पर कुछ पता नहीं चला। मैने एक परिचित को रोका, लेकिन वह भी रूका नहीं। मैं हैरान हो गया, हर चीज में खबर ढूंढने की आदत जो है, तो मैने अपने शहर के ही एक खबरीलाल को मोबाईल से काल करके पूछा। उसने कहा घर पर हूं, यहीं आ जाओ फिर आराम से बताउंगा।...

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दैनिक छत्‍तीसगढ में ब्‍यूरो चीफ जिला जांजगीर-चांपा
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