विश्व मजदूर दिवसजिंदगी में सफल होने के लिए दो चीजों की काफी जरूरत है, हिम्मत और मेहनत। हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती, मेहनत करने वाले कभी विफल नहीं होते। दुनिया की संरचना में भी मेहनत करने वाले श्रमवीरों ने समय-समय पर नए इतिहास रचे हैं। अपना पसीना बहाकर आसमान छूती इमारतों को खड़ा करने वाले आज भी जमीन पर हैं और बुलंद इमारतों के उपर खड़ा धनाढ्य वर्ग मुस्कुराता हुआ इठला रहा है।आज जिस खूबसूरत इमारत ताजमहल को देखने के लिए देश ही नहीं,...
कितना औद्योगिकरण जरूरी है ?उद्योगों की चिमनियों से निकलता काला-सफेद धुआं, सरकारी जमीनों पर कब्जा करती राख, कम होती कृषि भूमि और जनता का विरोध, इन उद्योगों के लगने से देश, प्रदेश, शहर, गांव का विकास होगा, या फिर लोगों के हिस्से में आएगा धूल, धुआं और राख, बढ़ेगा तापमान, तो गर्मी से कैसे निजात पाएंगे लोग, धान का कटोरा बन जाएगा का राख का कटोरा, इसलिए ऐसे औद्योगीकरण के पहले ग्लोबल वार्मिंग पर विचार करना भी जरूरी है। पर्यावरण के सौदागर भूल चुके...
0 बुजुर्ग ग्रामीण ने मुख्यमंत्री से कहा 0 कोसमंदा में उतरा मुख्यमंत्री का उड़नखटोला मुख्यमंत्री डॉं. रमनसिंह जब कोसमंदा गांव पहुंचे तो एक बुजुर्ग ग्रामीण को भीड़ में जद्दोजहद करते देखकर उन्होंने अपने पास बुला लिया और पूछा - राम राम बबा, कईसे आए हस, कुछु समस्या हे का। तब बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री को जवाब दिया - नईं साहेब, तूंहर दरसन करे आए हवं। ग्रामीण की भावना से मुख्यमंत्री डा. सिंह काफी द्रवित हो गए, उसके बाद गांव की कई समस्याओं का निराकरण...
0 जलस्तर में लगातार गिरावट0 10 वर्षों बाद उपजेगा घोर जल संकटछत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने जांजगीर-चांपा जिले में 34 पावर कंपनियों से 40 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए एमओयू करके आम जनता के भविष्य को संकट में डाल दिया है। 40 हजार मेगावाट के विद्युत उत्पादन के लिए प्रतिवर्ष 16000 लाख घनमीटर पानी की जरूरत होगी, समझा जा सकता है कि इतनी बड़ी मात्रा में जब उद्योगों को पानी दिया जाएगा, तो आम जनता के लिए पानी कहां से आएगा ? सबसे खास बात यह है...
छत्तीसगढ़ प्रदेश में 19 अप्रेल से ग्राम सुराज अभियान का आगाज हो चुका है। गांवों, गरीबों की समस्याओं की सुध लेने तथा उसे हल करने के लिए मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सहित कई मंत्री, विधायक, सरकारी अधिकारी गांवों में पहुंच रहे हैं, पर इस बार ग्रामीणों के तीखे तेवरों से नेताओं और अधिकारियों को दो चार होना पड़ रहा है। कारण साफ है कि पिछले वर्षों में चलाए गए सुराज अभियान के तहत् मिले आवेदनों, समस्याओं का निपटारा अब तक नहीं हुआ है। अधिकारियों कर्मचारियों...
ग्राम सुराज अभियान के पहले दिन ही कई सुराज दलों को ग्रामीणों के आक्रोश से दो चार होना पड़ा। बिर्रा क्षेत्र में प्रस्तावित मोजरबेयर पावर कंपनी के प्लांट का विरोध करते हुए सिलादेही के ग्रामीणों ने सुराज दल को स्कूल के अंदर जाने ही नहीं दिया। सुराज दल को रोके जाने की सूचना पर गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों को भी कई घंटे बिठाए रखा और सुराज अभियान का बहिष्कार कर दिया। ...
देश में हर तरफ अण्णा राग की धूम है। फेसबुक अण्णा हजारे की खबरों से भरी पड़ी है, मोबाईल में संदेश आ रहे हैं उनके आंदोलन को समर्थन देने के लिए। ब्लाग पर भी अण्णा की ही बातें पढ़ने को मिल रही हैं। हालात कुछ उसी तरह के बन गए हैं जैसे तमाम भ्रष्ट मंत्रियों, संतरियों की लाइलाज बीमारी का तोड़ एक अनार (अन्ना) ही हो। कोई सत्याग्रही बापू से उनकी तुलना कर रहा है, कोई उन्हें जेपी जैसा क्रांतिकारी बता रहा है। उनके एक उपवास, आमरण अनशन पर अब तक महाराष्ट्र...

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दैनिक छत्‍तीसगढ में ब्‍यूरो चीफ जिला जांजगीर-चांपा
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