
37 वर्षों से एक ही बिस्तर पर कोमा का दंश झेल रही अरूणा शानबाग को इच्छा मृत्यु दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी असहमति जता दी है यानि फिलहाल उसकी मौत अब हरि इच्छा पर ही निर्भर है। पुरूष प्रधान देश में सदियों से नारी शोषण का शिकार होती आई है। खुद को पाक साफ बताने माता सीता को अग्निपरीक्षा देनी पड़ी थी, अहिल्या को पत्थर की मूरत बनकर श्राप झेलना पड़ा और कृष्णभक्त मीरा को जहर का प्याला पीना पड़ा। पुरूषत्व के दंभ और अत्याचार की कलयुगी परिणिति...
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